पेट-दर्द-के-कारण-और-घरेलू-इलाज

Estimated reading time: 6 minutes

Home-remedies-for-abdominal-Pain-stomach-ache
Home remedies for Stomach Pain

पेट दर्द की उत्पत्ति अधिक गरिष्ट व वायु कारक खाद्य पदार्थों के सेवन से होती है। जब कोई खाद्य पदार्थ देर तक नहीं पचता और वायु की उत्पत्ति करता है तो पेट दर्द होने लगता है। छोटे बच्चे हर समय कुछ-न-कुछ खाते-पीते रहते हैं। एक बार भोजन करने के बाद स्वादिष्ट चटपटे खाद्य पदार्थ देखकर झट-से खाने को तैयार हो जाते हैं। भोजन की पाचन क्रिया से पहले खाय पदार्थों का सेवन करने से पेट दर्द होने लगता है। कुछ बच्चे खेलने, स्कूल जाने के चक्कर में इतनी जल्दी भोजन खाते हैं कि भोजन उदर में देर तक पच नहीं पाता और फिर उदर में शूल की उत्पत्ति होने लगती है।

भोजन करने के बाद उछल-कूद करने, दौड़ने और सीढ़ियां चढ़ने-उतरने से भी पेट दर्द होने लगता है। कुछ बच्चों और वयस्कों में सुबह देर से उठने की बुरी आदत होती है। ऐसे स्त्री-पुरुष और बच्चे समय पर शोच नहीं जाते समय पर शौच नहीं जाने से शौच नहीं आती। कई-कई दिन शौच नहीं जाने से कोष्ठबद्धता अर्थात कब्ज हो जाती है। कोष्ठबद्धता के कारण अंगों में मल एकत्र होने से पेट में दर्द होने लगता है।

उदर शूल की उत्पत्ति दूसरे रोग-विकारों के कारण भी हो सकती है। यकृत (जिगर) की खराबी, आमाशय के किसी रोग, आंत्रशोथ, अतिसार, प्रवाहिका (पेचिश), आंव-मरोड़ के कारण भी तीव्र पेट दर्द होता है। वृक्क शोथ अर्थात गुर्दों में सूजन होने पर मल का निष्कासन पूरी तरह नहीं होने पर उदरशूल होने लगता है। अजीर्ण रोग में भी तीव्र पेट दर्द होता है। वायु विकार (गैस) में इतना तीव्र पेट दर्द होता कि रोगी पीड़ा से तड़प उठता है।

Home remedies for Stomach Pain पेट दर्द के गुणकारी घरेलू नुस्खे और इलाज

पेट-दर्द-के-कारण-और-घरेलू-इलाज
पेट दर्द के घरेलू इलाज
  • कोष्ठबद्धता के कारण पेट दर्द होने पर कोष्ठबद्धता को नष्ट करने के लिए हरड़ का चूर्ण 3 ग्राम मात्रा में हल्के उष्ण जल से सेवन करें। पेट दर्द भी नष्ट होता है।
  • सोंठ को पीसकर चूर्ण बनाकर रखें। सोंठ का चूर्ण 3 ग्राम सेंधा नमक मिलाकर हल्के उष्ण जल से सेवन कराने पर पेट दर्द नष्ट होता है। हींग को उष्ण जल में घोलकर नाभि के आस-पास गाढ़ा लेप करने से पेट दर्द से मुक्ति मिलती है।
  • काला नमक, सोंठ और भुनी हुई हींग का चूर्ण बनाकर 3 ग्राम चूर्ण उष्ण जल से सेवन करने पर अफारे के कारण उत्पन्न पेट दर्द नष्ट होता है।
  • सेंधा नमक, काला नमक, विड लवण (नौसादर), चव्य, चित्रक, शुण्ठी, पिप्पली मूल और डींग सभी बराबर मात्रा में लेकर कूट-पीसकर चूर्ण बनाएं। इसमें से 3 ग्राम चूर्ण उष्ण जल के साथ सेवन करने से कफ विकृति से उत्पन्न पेट दर्द नष्ट होता है।
  • एरंड का तेल 10 ग्राम दूध में मिलाकर पीने से कब्ज होने पर पेट दर्द नष्ट होता है 1 • त्रिफला के 3 ग्राम चूर्ण में 3 ग्राम मिश्री मिलाकर हल्के उष्ण जल के साथ सेवन करने से अनेक प्रकार के उदर शूल नष्ट होते हैं।
  • आधे नीबू के रस में थोड़ा-सा सेंधा नमक मिलाकर 100 ग्राम जल में डालकर पीने से उदर पेट दर्द होता है।
  • अजवायन और काला नमक बराबर मात्रा में पीसकर 3 ग्राम मात्रा में उष्ण जल के साथ सेवन करने पर उदर शूल का निवारण होता है।
  • पोदीने के सात पत्ते और छोटी इलायची का एक दाना पान के पत्ते में रखकर खाने से उदर शूल बहुत लाभ होता है। 10 ग्राम जामुन का सिरका 50 ग्राम जल में मिलाकर पिलाने से पेट दर्द नष्ट होता है।
  • लहसुन का रस 3 ग्राम में थोड़ा-सा सेंधा नमक मिलाकर खिलाने और से गर्म जल पिलाने पर पेट दर्द नष्ट होता है।
  • अनन्नास के 10 ग्राम रस में अदरक का रस 2 रत्ती, भुनी हींग 1 रत्ती और सेंधा नमक 2 रत्ती मिलाकर सेवन करने से पेट दर्द नष्ट होता है।
  • अजमोद के चूर्ण में काला नमक बराबर मात्रा में मिलाकर 3 ग्राम चूर्ण उष्ण जल से सेवन करने पर अफारा नष्ट होने से पेट दर्द नष्ट होता है।
  • तुलसी के पत्तों का रस और अदरक का रस 5-5 ग्राम मिलाकर थोड़े से गुनगुने जल में मिलाकर पीने से उदर शूल नष्ट होता है।
  • 2 ग्राम जीरा पीसकर थोड़ा-सा मधु मिलाकर चाटकर सेवन करें। ऊपर से थोड़ा-सा उष्ण जल पीने से पेट दर्द से मुक्ति मिलती है।
  • वायु विकार से उदर शूल होने पर 5 ग्राम हल्दी, इतना ही सेंधा नमक मिलाकर हल्के उष्ण जल से सेवन करने पर बहुत लाभ होता है।
  • 20 ग्राम मूली के रस में थोड़ा-सा सेंधा नमक और 4 काली मिर्च का चूर्ण मिलाकर सेवन करने से पेट दर्दनष्ट होता है।
  • जामुन में सेवा नमक लगाकर खाने से पेट दर्दनष्ट होता है।
  • पपीते को काटकर काली मिर्च और नीबू का रस डालकर, सेंधा नमक के साथ खाने से कब्ज नष्ट होने से उदर शूल नहीं होता है।
  • संतरे के 20 ग्राम रस में थोड़ी सी भुनी हींग और काला नमक मिलाकर पीने से उदर शूल नष्ट हो जाता है। अनार के 30 ग्राम रस में थोड़ी-सी भुनी हींग और काला नमक मिलाकर पीने से उदर शूल नष्ट हो जाता है।
  • 50 ग्राम इंजयव को 500 ग्राम जल में उबालकर क्याथ (काढ़ा) बनाकर 100 ग्राम क्वाथ थोड़ी-सी मुनी हींग मिलाकर पीने से पेट दर्द नष्ट होता है।
  • कुलंजन, सैंधा नमक, धनिया, जीरा और किशमिश को बराबर की मात्रा में लेकर नीबू के रस के साथ पीसकर सेवन करें।
  • गुलाब के तीन फूल, मुलहठी, अंजीर, मुनक्का और सौंफ 5-5 ग्राम लेकर 500/ ग्राम जल में क्वाथ बनाकर 100 ग्राम क्वाथ पीने से कब्ज नष्ट होने पर उदर शूल नष्ट होता है।
  • कुलंजन, अजवाइन और काला नमक प्रत्येक 10-10 ग्राम कूट-पीसकर चूर्ण बनाकर रखें। इसमें से 3 ग्राम चूर्ण हल्के उष्ण जल से लें।
  • 3 ग्राम केसर को 3 ग्राम दालचीनी के साथ पीसकर उष्ण जल से सेवन करने पर पेट दर्द नष्ट होता है।
  • अमरूद के कोमल 50 ग्राम पत्तों को पीसकर जल में अच्छी तरह मिलाकर छान लें। इस जल को पीने से पेट दर्द नष्ट होता है।
  • कब्ज के कारण उदर शूल होने पर 250 ग्राम तक (मट्ठा) में भुना जीरा 5 आम और काला नमक 5 ग्राम मिलाकर पीने से पेट दर्द नष्ट होता है।
  • अमरूद के फल की फुगनी थोड़े से सैंधा नमक के साथ मिलाकर खाने और उष्ण जल पीने से पेट दर्द नष्ट होता है। अमलतास का गूदा 25 ग्राम में थोड़ा-सा नमक मिलाकर गोमूत्र के साथ पीसकर उदर लेप करने से शूल शीघ्र नष्ट होता है।
  • अदरक का रस 5 ग्राम, नीबू का रस 5 ग्राम, काली मिर्च का चूर्ण 1मिलाकर पीने से उदर शूल नष्ट होता है।